दिवाली पर मिटटी के दिए जलाने का महत्व- मेरा गुल्लक

दिवाली में मिटटी के दिए जलाने का महत्व 

दिवाली हिन्दुओ का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्यौहार है| बताया जाता है की दिवाली के दिन ही भगवान् श्री राम चन्द्र जी रावण को मारकर वापस अयोध्या आये थे| तब अयोध्या वासियों ने उसी की ख़ुशी में रात्रि में दिए जला कर उनका स्वागत किया था| यह त्यौहार कार्तिक मॉस की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है जो की पूर्ण रात्रि अन्धकार मय होती है| जिसे हम सभी मिटटी के दिए जलाकर उजाला करते है| तब से हम ये त्यौहार हर वर्ष मानते चले आ रहे है|

तो आइये आपको हम बताते है कि दिवाली पर कैसे दिए जलाने चाहिए? प्रचलन के अनुसार तो बाजार में आज बहुत प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स और झालर उपलब्ध है जो की बिजली के समवहन से ही क्रिया शील होते है| परन्तु ये इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स हमारे पूर्व आस्था को नहीं बल्कि आधुनिक दिखावे को प्रदर्शित करती है| और ये त्यौहार हम दिखावे के लिए नहीं बल्कि अपनी आस्था और अपने प्राचीन अस्तित्व को स्मरण में रखने के लिए करते है तो हमें इन लाइट्स के स्थान पर अपने स्वदेशी मिटटी के दिए उपयोग करने चाहिए| जो आजकल बाज़ार में भी उपलब्ध है और अगर आप चाहे तो ऑनलाइन भी खरीद सकते है| जहाँ आपको अच्छा डिस्काउंट भी मिल रहा है|

मात्र रु. 199/- में खरीदें 21 दीयों का सेट 

मिटटी के दिए

  • मूल्य मात्र रु. 199/- (रु.299 पर छूट 33%) में 21 दिए
  • 5% अतिरिक्त डिस्काउंट एक्सिस बैंक के बज्ज क्रेडिट कार्ड के साथ
  • 10 दिनों के अन्दर एक्सचेंज कर सकते है|
  • कैश ऑन डिलीवरी भी उपलब्ध है|
  •  मिटटी के दिए ऊंचाई 3 इंच और चौड़ाई 5 इंच है|

 

 

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  • 10 दिनों के अन्दर एक्सचेंज कर सकते है|
  • कैश ऑन डिलीवरी भी उपलब्ध है|
  • मिटटी के दिए की ऊंचाई 2 इंच और चौड़ाई भी 2 इंच है|

 

 

 

 

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